रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ
रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ
चौपाई ३, दोहा २३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ॥ मोहि अतिसय प्रतीति मन केरी। जेहिं सपनेहुँ परनारि न हेरी॥ ३ ॥
अर्थ
रघुवंशियों का यह सहज (जन्मगत) स्वभाव है कि उनका मन कभी कुमार्ग पर पैर नहीं रखता। मुझे तो अपने मन का अत्यन्त ही विश्वास है कि जिसने [जाग्रत् की कौन कहे] स्वप्न में भी परायी स्त्री पर दृष्टि नहीं डाली है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन