जासु बिलोकि अलौकिक सोभा
जासु बिलोकि अलौकिक सोभा
चौपाई २, दोहा २३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जासु बिलोकि अलौकिक सोभा। सहज पुनीत मोर मनु छोभा॥ सो सबु कारन जान बिधाता। फरकहिं सुभद अंग सुनु भ्राता॥ २ ॥
अर्थ
जिसकी अलौकिक सुंदरता देखकर स्वभाव से ही पवित्र मेरा मन क्षुब्ध हो गया है। वह सब कारण तो विधाता जानें। किन्तु हे भाई! सुनो, मेरे शुभ अंग फड़क रहे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन