रबि निज उदय ब्याज रघुराया
रबि निज उदय ब्याज रघुराया
चौपाई ३, दोहा २३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया॥ तव भुज बल महिमा उदघाटी। प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी॥ ३ ॥
अर्थ
हे रघुनाथजी। सूर्य ने अपने उदय के बहाने सब राजाओं को प्रभु (आप) का प्रताप दिखलाया है। आपकी भुजाओं के बल की महिमाको उद्घाटित करने (खोलकर दिखाने) के लिये ही धनुष तोड़नेकी यह पद्धति प्रकट हुई है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद