ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे

चौपाई २, दोहा २३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे॥ उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे नखत जग तेजु प्रकासा॥ २ ॥

अर्थ

वैसे ही हे प्रभो! आपके सब भक्त धनुष टूटने पर सुखी होंगे। सूर्य उदय हुआ, बिना ही परिश्रम अन्धकार नष्ट हो गया। तारे छिप गये, जगत में तेज का प्रकाश हो गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद