बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने
बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने
चौपाई ४, दोहा २३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने॥ नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए। चरन सरोज सुभग सिर नाए॥ ४ ॥
अर्थ
भाई के वचन सुनकर प्रभु मुसकराये। फिर स्वभाव से ही पवित्र श्रीरामजी ने शौच से निवृत्त होकर स्नान किया और नित्यकर्म करके वे गुरुजी के पास आये। आकर उन्होंने गुरुजी के सुन्दर चरणकमलों में सिर नवाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद