पुरबासिन्ह तब राय जोहारे
पुरबासिन्ह तब राय जोहारे
चौपाई ३, दोहा ३४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे॥ करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा॥ ३ ॥
अर्थ
तब अयोध्यावासियों ने राजा को जोहार (वन्दना) की। श्रीरामचन्द्रजी को देखते ही वे सुखी हो गये। सब मणियाँ और वस्त्र निछावर कर रहे हैं। नेत्रों में [प्रेमाश्रुओं का] जल भरा है और शरीर पुलकित हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना