आरति करहिं मुदित पुर नारी

चौपाई ४, दोहा ३४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुअँर बर चारी॥ सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी॥ ४ ॥

अर्थ

नगर की स्त्रियाँ आनन्दित होकर आरती कर रही हैं और सुन्दर चारों कुमारों को देखकर हर्षित हो रही हैं। पालकियों के सुन्दर परदे हटा-हटाकर वे दुलहिनों को देखकर सुखी होती हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना