बिपुल बाजने बाजन लागे
बिपुल बाजने बाजन लागे
चौपाई २, दोहा ३४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिपुल बाजने बाजन लागे। नभ सुर नगर लोग अनुरागे॥ बने बराती बरनि न जाहीं। महा मुदित मन सुख न समाहीं॥ २ ॥
अर्थ
बहुत-से बाजे बजने लगे। आकाश में देवता और नगर के लोग सब प्रेम में मग्न हैं। बराती ऐसे बने-ठने हैं कि उनका वर्णन नहीं हो सकता। परम आनन्दित हैं, सुख उनके मन में समाता नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना