पुर जन आवत अकनि बराता
पुर जन आवत अकनि बराता
चौपाई २, दोहा ३४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता॥ निज निज सुंदर सदन सँवारे। हाट बाट चौहट पुर द्वारे॥ २ ॥
अर्थ
बारात को आती हुई सुनकर नगर निवासी प्रसन्न हो गये। सब के शरीरों पर पुलकावली छा गयी। सब ने अपने-अपने सुन्दर घरों, बाजारों, गलियों, चौराहों और नगर के द्वारों को सजाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना