हने निसान पनव बर बाजे
हने निसान पनव बर बाजे
चौपाई १, दोहा ३४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हने निसान पनव बर बाजे। भेरि संख धुनि हय गय गाजे॥ झाँझि बिरव डिंडिमी सुहाई। सरस राग बाजहिं सहनाई॥ १ ॥
अर्थ
नगाड़ों पर चोटें पड़ने लगीं; सुन्दर ढोल बजने लगे। भेरी और शंख की ध्वनि हो रही है; हाथी-घोड़े गरज रहे हैं। विशेष शब्द करने वाली झाँझें, सुहावनी डिंडिमियाँ तथा रसीले राग से शहनाइयाँ बज रही हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना