पुनि बसिष्टु मुनि कौसिकु आए

चौपाई २, दोहा ३५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि बसिष्टु मुनि कौसिकु आए। सुभग आसनन्हि मुनि बैठाए॥ सुतन्ह समेत पूजि पद लागे। निरखि रामु दोउ गुर अनुरागे॥ २ ॥

अर्थ

फिर मुनि वसिष्ठजी और विश्वामित्रजी आये। राजा ने उनको सुंदर आसनों पर बैठाया और पुत्रों सहित उनकी पूजा करके उनके चरणों लगे। दोनों गुरु श्रीरामजी को देखकर प्रेम में मुग्ध हो गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना