कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा
कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा
चौपाई ३, दोहा ३५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा॥ मुनि मन अगम गाधिसुत करनी। मुदित बसिष्ट बिपुल बिधि बरनी॥ ३ ॥
अर्थ
वसिष्ठजी धर्म के इतिहास कह रहे हैं और राजा रानिवास सहित सुन रहे हैं। जो मुनियों के मन को भी अगम्य है, ऐसी विश्वामित्रजी की करनी को वसिष्ठजी ने आनन्दित होकर बहुत प्रकार से वर्णन किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना