प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने

चौपाई ४, दोहा ३५३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने॥ देव देखि रघुबीर बिबाहू। बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू॥ ४ ॥

अर्थ

जिन मेहमानों को प्रिय और पूजनीय जाना, उनका राजा ने भलीभाँति सम्मान किया। देवगण श्रीरघुबीर के विवाह को देखकर, उत्सव की प्रशंसा करके फूल बरसाते हुए--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना