प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए

चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए॥ पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई॥ ४ ॥

अर्थ

हिमाचल ने पहले ही बहुत-से घर सजवा रखे थे। यथायोग्य उन-उन स्थानों में सब लोग ठहर गये। नगर की सुन्दर शोभा देखकर ब्रह्मा की रचना-चातुरी भी तुच्छ लगती थी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात