आयुध सर्ब समर्पि कै प्रभु निज
आयुध सर्ब समर्पि कै प्रभु निज
दोहा २०९ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
आयुध सर्ब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि। कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि॥ २०९ ॥
अर्थ
सब अस्त्र-शस्त्र समर्पण करके मुनि प्रभु श्रीरामजी को अपने आश्रम में ले आये; और उन्हें परम हितू जानकर भक्तिपूर्वक कन्द, मूल और फल का भोजन कराया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का दोहा २०९ है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।
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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना