प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू
प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू
चौपाई १, दोहा १७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू॥ जोग भोग महँ राखेउ गोई। राम बिलोकत प्रगटेउ सोई॥ १ ॥
अर्थ
मैं परिवारसहित राजा जनकजी को प्रणाम करता हूँ, जिनका श्रीरामजी के चरणों में गूढ़ प्रेम था, जिसे उन्होंने योग और भोग में छिपा रखा था; परन्तु श्रीरामचन्द्रजी को देखते ही वह प्रकट हो गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।
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सीताराम और परिकर वन्दना