प्रमुदित मुनिन्ह भावँरीं फेरीं
प्रमुदित मुनिन्ह भावँरीं फेरीं
चौपाई ४, दोहा ३२५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रमुदित मुनिन्ह भावँरीं फेरीं। नेगसहित सब रीति निबेरीं॥ राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं॥ ४ ॥
अर्थ
मुनियों ने आनन्दपूर्वक भाँवरें फिरायीं और नेग सहित सब रीतियों को पूरा किया। श्रीरामचन्द्रजी सीताजी के सिर में सिंदूर दे रहे हैं; यह शोभा किसी प्रकार भी कही नहीं जाती।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह