पीत बसन परिकर कटि भाथा
पीत बसन परिकर कटि भाथा
चौपाई २, दोहा २१९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पीत बसन परिकर कटि भाथा। चारु चाप सर सोहत हाथा॥ तन अनुहरत सुचंदन खोरी। स्यामल गौर मनोहर जोरी॥ २ ॥
अर्थ
दोनों भाइयों के पीले वस्त्र हैं, कमर में तरकस बँधे हैं। हाथों में सुन्दर धनुष-बाण सुशोभित हैं। श्याम और गौर वर्ण के शरीरों पर सुन्दर चन्दन की खोरी लगी है। साँवरे और गोरे रंग की मनोहर जोड़ी है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण