केहरि कंधर बाहु बिसाला
केहरि कंधर बाहु बिसाला
चौपाई ३, दोहा २१९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
केहरि कंधर बाहु बिसाला। उर अति रुचिर नागमनि माला॥ सुभग सोन सरसीरुह लोचन। बदन मयंक तापत्रय मोचन॥ ३ ॥
अर्थ
सिंह के समान गर्दन है; विशाल भुजाएँ हैं। छाती पर अत्यन्त सुन्दर नागमणि की माला है। सुन्दर लाल कमल के समान नेत्र हैं। तीनों तापों से छुड़ाने वाला चन्द्रमा के समान मुख है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण