फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा

चौपाई ३, दोहा ५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा। सहित बंधु सिय सुंदर बेषा॥ जहँ चितवहिं तहँ प्रभु आसीना। सेवहिं सिद्ध मुनीस प्रबीना॥ ३ ॥

अर्थ

[तब उन्होंने] पीछे की ओर फिरकर देखा, तो वहाँ भी भाई लक्ष्मणजी और सीताजी के साथ श्रीरामचन्द्रजी सुन्दर वेष में दिखायी दिये। वे जिधर देखती हैं, उधर ही प्रभु श्रीरामचन्द्रजी विराजमान हैं और सुचतुर सिद्ध मुनीश्वर उनकी सेवा कर रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।

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सती का भ्रम और खेद