जाना राम सतीं दुखु पावा
जाना राम सतीं दुखु पावा
चौपाई २, दोहा ५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा॥ सतीं दीख कौतुकु मग जाता। आगें रामु सहित श्री भ्राता॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने जान लिया कि सतीजी को दुःख हुआ; तब उन्होंने अपना कुछ प्रभाव प्रकट करके उन्हें दिखलाया। सतीजी ने मार्ग में जाते हुए यह कौतुक देखा कि श्रीरामचन्द्रजी सीताजी और लक्ष्मणजी सहित आगे चले जा रहे हैं। [इस अवसर पर सीताजी को इसलिए दिखाया कि सतीजी श्रीराम के सच्चिदानन्दमय रूप को देखें, वियोग और दुःख की कल्पना जो उन्हें हुई थी वह दूर हो जाय तथा वे प्रकृतिस्थ हों]।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।
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सती का भ्रम और खेद