फल अनेक बर बस्तु सुहाईं
फल अनेक बर बस्तु सुहाईं
चौपाई २, दोहा ३०५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
फल अनेक बर बस्तु सुहाईं। हरषि भेंट हित भूप पठाईं॥ भूषन बसन महामनि नाना। खग मृग हय गय बहु बिधि जाना॥ २ ॥
अर्थ
उत्तम फल तथा और भी अनेकों सुन्दर वस्तुएँ राजा ने हर्षित होकर भेंट के लिये भेजीं। गहने, कपड़े, नाना प्रकार की मूल्यवान् मणियाँ, पक्षी, पशु, घोड़े, हाथी और बहुत तरह की सवारियाँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान