मंगल सगुन सुगंध सुहाए

चौपाई ३, दोहा ३०५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मंगल सगुन सुगंध सुहाए। बहुत भाँति महिपाल पठाए॥ दधि चिउरा उपहार अपारा। भरि भरि काँवरि चले कहारा॥ ३ ॥

अर्थ

तथा बहुत प्रकार के सुगन्धित एवं सुहावने मंगल-द्रव्य और सगुन के पदार्थ राजा ने भेजे। दही, चिउरा और अगणित उपहार की चीजें काँवरों में भर-भरकर कहार चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान