परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही

चौपाई २, दोहा २३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित्त भीतीं लिखि लीन्ही॥ गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी॥ २ ॥

अर्थ

तब परम प्रेममयी कोमल स्याही बनाकर अपने सुन्दर चित्त-भित्तियों पर उन्हें लिख लिया। फिर भवानीजी के भवन में गयीं और चरणों की वन्दना करके हाथ जोड़कर बोलीं—

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद