जानि कठिन सिवचाप बिसूरति
जानि कठिन सिवचाप बिसूरति
चौपाई १, दोहा २३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति॥ प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी॥ १ ॥
अर्थ
शिवजी के धनुष को कठिन जानकर वे व्याकुल होती हुई हृदय में साँवली मूर्ति को रखकर चलीं। प्रभु ने जब श्रीजानकीजी को जाते हुए देखा, सुख, स्नेह, शोभा और गुणों की खान—
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद