जय जय गिरिबरराज किसोरी

चौपाई ३, दोहा २३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी॥ जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता॥ ३ ॥

अर्थ

हे गिरिवरराज की किशोरी! आपकी जय हो, जय हो; हे महेश के मुख-चंद्र की चकोरी! आपकी जय हो; हे गजवदन और षडानन की माता! हे जगत् जननी! हे दामिनी-द्युति वाली देहवाली! आपकी जय हो!

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद