परबस सखिन्ह लखी जब सीता
परबस सखिन्ह लखी जब सीता
चौपाई ३, दोहा २३४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
परबस सखिन्ह लखी जब सीता। भयउ गहरु सब कहहिं सभीता॥ पुनि आउब एहि बेरिआँ काली। अस कहि मन बिहसी एक आली॥ ३ ॥
अर्थ
जब सखियों ने सीताजी को परवश (प्रेम के वश) देखा, तब सब भयभीत होकर कहने लगीं—बड़ी देर हो गयी [अब चलना चाहिये]। कल इसी बेला फिर आयेंगी, ऐसा कहकर एक सखी मन में हँसी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन