पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा

चौपाई २, दोहा १०१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हियँ हरषे तब सकल सुरेसा॥ बेदमंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं॥ २ ॥

अर्थ

जब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वती का पाणिग्रहण किया, तब [इन्द्रादि] सब देवता हृदय में बड़े ही हर्षित हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमन्त्रों का उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजी का जय-जयकार करने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

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शिवजी का विवाह