जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई

चौपाई १, दोहा १०१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई॥ गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥ १ ॥

अर्थ

वेदों में विवाह की जैसी रीति कही गयी है, महामुनियों ने वह सभी रीति करवायी। पर्वतराज हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर तथा कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजी को समर्पण किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

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शिवजी का विवाह