जासु अंस उपजहिं गुनखानी
जासु अंस उपजहिं गुनखानी
चौपाई २, दोहा १४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी॥ भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई॥ २ ॥
अर्थ
जिनके अंश से गुणों की खान अगणित लक्ष्मी, उमा और ब्रह्माणी उत्पन्न होती हैं तथा जिनकी भौंह के इशारे से ही जगत् की रचना होती है, वही [भगवान् की स्वरूपा-शक्ति] श्रीसीताजी श्रीरामचन्द्रजी की बायीं ओर स्थित हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान