हर गन हम न बिप्र मुनिराया
हर गन हम न बिप्र मुनिराया
चौपाई २, दोहा १३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया॥ श्राप अनुग्रह करहु कृपाला। बोले नारद दीनदयाला॥ २ ॥
अर्थ
हे मुनिराज! हम ब्राह्मण नहीं हैं, शिवजी के गण हैं। हमने बड़ा अपराध किया, जिसका फल हमने पा लिया। हे कृपालु ! अब शाप दूर करने की कृपा कीजिये। दीनों पर दया करने वाले नारदजी ने कहा--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग