निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा
निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा
चौपाई १, दोहा २२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा॥ कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी॥ १ ॥
अर्थ
रात्रि का प्रवेश होते ही (संध्या के समय) मुनि ने आज्ञा दी, तब सभी ने संध्यावंदन किया। फिर प्राचीन कथाएँ तथा इतिहास कहते-कहते सुन्दर रात्रि दो पहर बीत गयी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण