निसा घोर गंभीर बन पंथ न
निसा घोर गंभीर बन पंथ न
दोहा १५९ (क) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
निसा घोर गंभीर बन पंथ न सुनहु सुजान। बसहु आजु अस जानि तुम्ह जाएहु होत बिहान॥ १५९ (क) ॥
अर्थ
हे सुजान! सुनो, घोर गंभीर वन-पंथ है, रास्ता नहीं है, ऐसा समझकर तुम आज यहीं ठहर जाओ, सबेरा होते ही चले जाना।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १५९ (क) है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा