हम कहँ दुर्लभ दरस तुम्हारा

चौपाई ४, दोहा १५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हम कहँ दुर्लभ दरस तुम्हारा। जानत हौं कछु भल होनिहारा॥ कह मुनि तात भयउ अँधिआरा। जोजन सत्तरि नगरु तुम्हारा॥ ४ ॥

अर्थ

हमें आपका दर्शन दुर्लभ था, इससे जान पड़ता है कुछ भला होने वाला है। मुनि ने कहा-- हे तात! अँधेरा हो गया। तुम्हारा नगर यहाँ से सत्तर योजन पर है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा