निज निज रुख रामहि सबु देखा
निज निज रुख रामहि सबु देखा
चौपाई ४, दोहा २४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा॥ भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ। राजाँ मुदित महासुख लहेऊ॥ ४ ॥
अर्थ
सबने रामजी को अपनी-अपनी ओर ही मुख किये हुए देखा; परन्तु इसका कुछ भी विशेष रहस्य कोई नहीं जान सका। मुनि ने राजा से कहा--रंगभूमि की रचना बड़ी सुन्दर है। [विश्वामित्र-जैसे निःस्पृह, विरक्त और ज्ञानी मुनि से रचना की प्रशंसा सुनकर] राजा प्रसन्न हुए और उन्हें बड़ा सुख मिला।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।
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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश