निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ
निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ
दोहा १८७ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ। बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ॥ १८७ ॥
अर्थ
देवताओं को यही सिखाकर कि वानर का तन धर-धरकर तुम लोग पृथ्वी पर जाकर भगवान् के चरणों की सेवा करो, ब्रह्माजी अपने लोक को चले गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “भगवान का वरदान” प्रकरण का दोहा १८७ है। इस प्रकरण में भगवान द्वारा रघुकुल में अवतार लेने के वरदान और देवताओं को मिली शांति का वर्णन है।
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भगवान का वरदान