एक बार भूपति मन माहीं

चौपाई १, दोहा १८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं॥ गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला॥ १ ॥

अर्थ

एक बार राजा के मन में बड़ी ग्लानि हुई कि मेरे पुत्र नहीं है। गुरु के घर तुरंत ही गये और चरणों में लगकर बहुत विनय की।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।

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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ