निगम नीति कुल रीति करि अरघ
निगम नीति कुल रीति करि अरघ
दोहा ३४९ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत। बधुन्ह सहित सुत परिछि सब चलीं लवाइ निकेत॥ ३४९ ॥
अर्थ
वेद की विधि और कुल की रीति करके अर्घ्य-पाँवड़े देते हुए बहुओं समेत सब पुत्रों को परछन करके माताएँ महल में लिवा चलीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३४९ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना