देखि मनोहर चारिउ जोरीं
देखि मनोहर चारिउ जोरीं
चौपाई ४, दोहा ३४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं॥ देत न बनहिं निपट लघु लागीं। एकटक रहीं रूप अनुरागीं॥ ४ ॥
अर्थ
चारों मनोहर जोड़ियों को देखकर सरस्वती ने सारी उपमाओं को खोज डाला; पर कोई उपमा देते नहीं बनी, क्योंकि वे उन्हें सभी बिल्कुल तुच्छ जान पड़ीं। तब हारकर वे भी श्रीरामजी के रूप में अनुरक्त होकर एकटक देखती रह गयीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना