नव पल्लव फल सुमन सुहाए

चौपाई ३, दोहा २२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नव पल्लव फल सुमन सुहाए। निज संपति सुर रूख लजाए॥ चातक कोकिल कीर चकोरा। कूजत बिहग नटत कल मोरा॥ ३ ॥

अर्थ

नये पत्तों, फलों और फूलों से युक्त सुन्दर वृक्ष अपनी सम्पत्ति से कल्पवृक्ष को भी लजा रहे हैं। पपीहे, कोयल, तोते, चकोर आदि पक्षी मीठी बोली बोल रहे हैं और मोर सुन्दर नृत्य कर रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।

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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन