मध्य बाग सरु सोह सुहावा

चौपाई ४, दोहा २२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मध्य बाग सरु सोह सुहावा। मनि सोपान बिचित्र बनावा॥ बिमल सलिलु सरसिज बहुरंगा। जलखग कूजत गुंजत भृंगा॥ ४ ॥

अर्थ

बाग के बीचोबीच सुहावना सरोवर सुशोभित है, जिसमें मणियों की सीढ़ियाँ विचित्र ढंग से बनी हैं। उसका जल निर्मल है, जिसमें अनेक रंगों के कमल खिले हुए हैं, जल के पक्षी कलरव कर रहे हैं और भ्रमर गुंजार कर रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।

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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन