नौमी तिथि मधु मास पुनीता

चौपाई १, दोहा १९१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता॥ मध्य दिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा॥ १ ॥

अर्थ

पवित्र चैत्रका महीना था, नवमी तिथि थी। शुक्लपक्ष और भगवान्‌का प्रिय अभिजित्‌ मुहूर्त्त था। दोपहरका समय था। न बहुत सरदी थी, न धूप (गरमी) थी। वह पवित्र समय सब लोकोंको शान्ति देनेवाला था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।

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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ