नारि बेष जे सुर बर बामा
नारि बेष जे सुर बर बामा
चौपाई ३, दोहा ३२२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा॥ तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं॥ ३ ॥
अर्थ
श्रेष्ठ देवांगनाएँ, जो सुन्दर मनुष्य-स्त्रियों के वेष में हैं, सभी स्वभाव से ही सुन्दरी और श्यामा हैं। उनको देखकर रनिवास की स्त्रियाँ सुख पाती हैं और बिना पहचान के ही वे प्राणों से भी प्यारी हो रही हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत