रानी सुनि उपरोहित बानी
रानी सुनि उपरोहित बानी
चौपाई २, दोहा ३२२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रानी सुनि उपरोहित बानी। प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी॥ बिप्र बधू कुल बृद्ध बोलाईं। करि कुलरीति सुमंगल गाईं॥ २ ॥
अर्थ
बुद्धिमती रानी पुरोहित की वाणी सुनकर सखियों समेत बड़ी प्रसन्न हुईं। ब्राह्मणों की स्त्रियों और कुल की वृद्ध स्त्रियों को बुलाकर उन्होंने कुलरीति से सुन्दर मंगलगीत गाये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत