नारद जानेउ नाम प्रतापू
नारद जानेउ नाम प्रतापू
चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू॥ नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू। भगत सिरोमनि भे प्रहलादू॥ २ ॥
अर्थ
नारदजी ने नाम के प्रताप को जाना है। हरि सारे संसार को प्यारे हैं, [हरि को हर प्यारे हैं] और आप (श्रीनारदजी) हरि और हर दोनों को प्रिय हैं। नाम के जपने से प्रभु ने कृपा की, जिससे प्रह्लाद भक्तशिरोमणि हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।
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रामनाम की महिमा