ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ

चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ॥ सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू॥ ३ ॥

अर्थ

ध्रुवजी ने ग्लानि से (विमाता के वचनों से दुखी होकर सकामभाव से) हरि नाम को जपा और उसके प्रताप से अचल अनुपम स्थान (ध्रुवलोक) प्राप्त किया। हनुमानजी ने पवित्र नाम का स्मरण करके श्रीरामजी को अपने वश में कर रखा है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा