नर नारायन सरिस सुभ्राता
नर नारायन सरिस सुभ्राता
चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नर नारायन सरिस सुभ्राता। जग पालक बिसेषि जन त्राता॥ भगति सुतिय कल करन बिभूषन। जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन॥ ३ ॥
अर्थ
ये दोनों अक्षर नर-नारायण के समान सुन्दर भाई हैं, ये जगत् का पालन और विशेषरूप से भक्तों की रक्षा करनेवाले हैं। ये भक्तिरूपिणी सुन्दर स्त्री के कानों के सुन्दर आभूषण (कर्णफूल) हैं और जगत् के हित के लिये निर्मल चन्द्रमा और सूर्य हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।
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रामनाम की महिमा