स्वाद तोष सम सुगति सुधा के

चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के॥ जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से॥ ४ ॥

अर्थ

ये सुन्दर गति (मोक्ष) रूपी अमृत के स्वाद और तृप्ति के समान हैं, कच्छप और शेषजी के समान पृथ्वी के धारण करनेवाले हैं, भक्तों के मनरूपी सुन्दर कमल में विहार करनेवाले भौरे के समान हैं और जीह-रूपी यशोदाजी के लिये श्रीकृष्ण और बलरामजी के समान (आनन्द देनेवाले) हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा