नहिं कलि करम न भगति बिबेकू
नहिं कलि करम न भगति बिबेकू
चौपाई ४, दोहा २७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू॥ कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू॥ ४ ॥
अर्थ
कलियुग में न कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान ही है; रामनाम ही एक आधार है। कपट की खान कलियुग-रूपी कालनेमि के [मारने के] लिए रामनाम ही बुद्धिमान् और समर्थ श्रीहनुमानजी हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।
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रामनाम की महिमा