नगर निकट बरात सुनि आई

चौपाई १, दोहा ९५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नगर निकट बरात सुनि आई। पुर खरभरु सोभा अधिकाई॥ करि बनाव सजि बाहन नाना। चले लेन सादर अगवाना॥ १ ॥

अर्थ

बरात को नगर के निकट आयी सुनकर नगर में चहल-पहल मच गयी, जिससे उसकी शोभा बढ़ गयी। अगवानी करनेवाले लोग बनाव-श्रृंगार करके तथा नाना प्रकार की सवारियों को सजाकर आदरसहित बरात को लेने चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात